Use of Ayush-based solutions for strengthening Immunity

Use of Ayush-based solutions for strengthening Immunity
Start Date :
Aug 21, 2020
Last Date :
Nov 14, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

Healthcare practices advocated by Ayush systems (namely Ayurveda, Yoga, Naturopathy, Unani, Siddha, Sowa-Rigpa and Homoeopathy) are known to promote general wellness. In fact, they ...

Healthcare practices advocated by Ayush systems (namely Ayurveda, Yoga, Naturopathy, Unani, Siddha, Sowa-Rigpa and Homoeopathy) are known to promote general wellness. In fact, they exert a positive impact both on the mind and the body. These practices aim to go beyond the symptoms diseasesand work on the overall strengths and weakness of an individual.They are normally free of side-effects, and their rewards are long-lasting.

COVID-19 has brought in new challenges before the health care system. With no definite cure for the disease, the health care systems all over world are stretched to their limits. The surest and safest way to survice the pandemic is to avoid falling sick. As a result, immunity of a person has become the key factor in prevention and treatment of COVID-19.

The strength of AYUSH systems in strengthening the natural immune system of the human bodyis well known. They provide solutions for this using readily available herbs, condiments etc., many of which are also widely used in our day to day cooking. The fact that the AYUSH medicines and therapies have negligible side effects is also a reason for their wide acceptability.

For many of us, our childhood memories include decoctions or medicines consumed to prevent disease like flu or viral infections. During the current pandemic also, the Ayush medicines and therapies have been extensively used,especially for prevention of disease. Documented and undocumented reports about Ayush-based solutions helpingboth in prevention of and recovery from Covid -19are increasingly seen in the public domain. Correct information about such solutions needs to be made available to the people across the country in easy formats, so that they can adopt them in their daily lives.

An effort has been made to compile some easy-to-adopt Ayush based immunity building measures/solutions.

Click here to read the Annexure.

Last Date: 14th November, 2020

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

सारिवादि वटी (divya sarivadi vati) एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कान के रोग, प्रमेह, रक्तपित्त रोग, क्षयरोग, श्वास फूलना, नपुंसकता, पुराना बुखार, मिर्गी, बवासीर, हृदय रोग और स्त्री रोग को नष्ट करने वाली होती है। इस वटी का प्रयोग मुख्यरूप से कान के रोगों में किया जाता है। कान के रोगों के लिए यह पतंजली द्वारा दी जाने वाली यह एक प्रमुख औषधि (Patanjali Medicine for Ears) है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

पाचनतंत्र संंबंधी परेशानी जैसा- भोजन का सही तरह से नहीं पचना, भूख कम लगना आदि में भी संशमनी वटी का उपयोग किया जा सकता है। यह पाचनतंत्र विकार को दूर करने में फायदेमंद होती है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

कई महिलाएं ल्यूकोरिया से ग्रस्त रहती हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे ना सिर्फ महिलाएं परेशानी रहती हैं बल्कि इसका महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। ल्यूकोरिया को ठीक करने के लिए भी संशमनी वटी (Shanshamani Vati) का उपयोग लाभदायक होता है। महिलाएं संशमनी वटी के उपयोग की जानकारी किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से लें।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

कई लोग पीलिया को बहुत साधारण रोग समझते हैं लेकिन सच यह है कि पीलिया एक जानलेवा बीमारी है। जब भी कोई व्यक्ति पीलिया से ग्रस्त होता है तो उसे ना सिर्फ सही इलाज की जरूरत होती है बल्कि कई तरह के परहेज भी करने होते हैं। पीलिया रोग को पाण्डु रोग (जौंडिस) भी बोलते हैं। आप पीलिया में संशमनी वटी से भरपूर लाभ ले सकते हैं।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

औदुम्बर कुष्ठ में शरीर की त्वचा खराब, और रूखी हो जाती है। इसमें त्वचा की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है, और शरीर सुन्नपन पड़ जाता है। पसीना अधिक निकलता है। ऐसे में आरोग्यवर्धिनी वटी को गन्धक रसायन के साथ प्रयोग करना चाहिए। यह कुष्ठ रोग की यह चमत्कारिक दवा है जिसे कुष्ठ रोग के साथ-साथ त्वचा रोगों में यह लाभ मिलता है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

औदुम्बर कुष्ठ में शरीर की त्वचा खराब, और रूखी हो जाती है। इसमें त्वचा की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है, और शरीर सुन्नपन पड़ जाता है। पसीना अधिक निकलता है। ऐसे में आरोग्यवर्धिनी वटी को गन्धक रसायन के साथ प्रयोग करना चाहिए। यह कुष्ठ रोग की यह चमत्कारिक दवा है जिसे कुष्ठ रोग के साथ-साथ त्वचा रोगों में यह लाभ मिलता है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

आरोग्य का मतलब होता है जहां रोग या बीमारी ना हो, और वर्धिनी का मतलब है रोग को दूर करे वाला। आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati) का मतलब है, वैसी वटी जो शरीर के रोगों को ठीक करे। आरोग्यवर्धिनी वटी एक औषधि है जिसका सेवन कर कई रोगों में लाभ पाया जा सकता है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

योग करते हुए सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेदिक चिकित्सा का ही लाभ लेना चाहिए, क्योंकि योग आपके शरीर की प्रकृति को सुधारता है। योग और आयुर्वेद का संबंध अटूट है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

आयुर्वेद एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। बहुत से ऐसे रोग और मानसिक विकार हो सकते हैं जिस पर योग कंट्रोल न भी कर पाए तो आयुर्वेद उसका विकल्प बन जाता है और बहुत से ऐसे रोग भी होते हैं जिसे आयुर्वेद न भी कंट्रोल कर पाए तो योग उसका विकल्प बन जाता है।

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Yatyendra singh 1 year 2 weeks ago

निश्चित ही योग करते हुए आप स्वस्थ रह सकते हैं लेकिन प्रकृति की शक्ति आपकी शक्ति से भी ज्यादा है और मौसम की मार सभी पर रह सकती है। हिमालय में प्राणायाम के अभ्यास से शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखा जा सकता है, लेकिन मान लो कोई गंभीर रोग हो ही गया तो फिर क्या कर सकते हैं। ऐसे में उन्होंने कई चमत्कारिक जड़ी-बुटियों की खोज की जो व्यक्ति को तुरंत तंदुरुस्त बनाकर दीर्घजीवन प्रदान करे।