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Start Date :
Jul 15, 2019
Last Date :
Jul 30, 2023
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

An open and free-flowing discussion forum where you can share your valuable ideas and suggestions on any subject of Governance and Policy-making, ideas which will help in building ...

An open and free-flowing discussion forum where you can share your valuable ideas and suggestions on any subject of Governance and Policy-making, ideas which will help in building a New India. (This forum is meant for those themes and topics which are not a part of other discussions on MyGov and yet may hold importance for citizens)

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Showing 109391 Submission(s)
Sandeep Azad
Sandeep Azad 4 years 2 weeks ago
प्रत्येक पोलिंग बूथ पर मतदाताओं को मतदान करने से पहले उसका बायोमेट्रिक एटैनडैंस बनाया जाना चाहिए।
Ruksar Saifi
Ruksar Saifi 4 years 2 weeks ago
Hame apne samj kinaur ache se kam karna chaiye jese ki aaj kal ke log pasie to ke lete hai par ache se kam nhi karte mera aap se nivaden ki in sabko boliye ko society maine ache se kam karke hi apna paise shi kam ke hisab se hi le
VATSALYADIXIT
VATSALYADIXIT 4 years 2 weeks ago
माननीय प्रधानमंत्री जी आजकल आप पब्लिक सेक्टर यानी सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और जो सही से काम नहीं कर रही उन्हें बेच भी रहे हैं। अच्छी बात है। बिज़नस की तरह भी कुछ काम होना चाहिए। हमारे सार्वजनिक उपक्रमों में जो अधिकारी श्रेणी में नहीं आते हैं (यानी नाॅन-एग्जीक्युटिव), उनकी बेसिक पे सैलरी भी एक लाख से डेढ़ लाख है और वह लेबर एक्ट के तहत आते हैं। पैसा तो अधिकारियों जितना और जिम्मेदारी के नाम पर कोई जिम्मेदारी नहीं। जबकि कॉन्ट्रैक्ट लेबर तकरीबन ₹20,000 महीना कमाता है जिसके लिए यह सही में कानून है। नाॅन-एग्जीक्युटिव का 8 घंटे का ओवर टाइम ₹10-15000 बैठता है जबकि कांट्रेक्ट लेबर 20 दिन में इतना कमाती है। क्या यह दोनों व्यक्ति एक समान है? इससे हमारी सार्वजनिक उपक्रम कंपनियों की बैलेंस शीट पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है। सुझाव -- जिस नाॅन-एग्जीक्युटिव की बेसिक पे 15000 तक है वह ही श्रमिक कानून और अधिनियम के अंतर्गत आए।
Annappa Hurali
Annappa Hurali 4 years 2 weeks ago
ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿ ಏನಾದರೂ ಸಾಧಿಸ ಲಿಕ್ಕೆ ಹಣ ಬೇಕು ಅವನ ಹತ್ತಿರ ಹಣವಿಲ್ಲ ಅವನು ತುಂಬಾ ಬಡವ ಬ್ಯಾಂಕ್ ನಲ್ಲಿ ಹೋಗಿ ಲೋನ್ ಪಡೆಯೊಡಕೆ ಅರ್ಜಿ ಸಲ್ಲಿಸಲಸುತಾನೆ ಅವನಿಗೆ ಬ್ಯಾಂಕ್ ಲಿ ಲೋನ್ ಸಿಗುವುದಿಲ್ಲ ಏಕೆಂದರೆ ಅವನ ಅಕೌಂಟ್ ನಲ್ಲಿ ೧ ರೂ ಪಾಯಿ ಹಣವಿಲ್ಲ ಟ್ರಾನಾಜಾಕ್ಷನ್ ವಿಲ್ಲ ಅಂತ ಹೇಳಿ ಕಳಿಸುತ್ತಾರೆ ದಯವಿಟ್ಟು ಮೇಲೆ ಹೇಳಿದ ಹಾಗೆ ನಮಂತಹ ಬಡವರಿಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡಿ ಸುಲಭ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಸಾಲ ಸೌ ಲಭ್ಯ ಸಿಗುವ ಹಾಗೆ ಮಾಡಿ
VaidyaRajeshKapoor
VaidyaRajeshKapoor 4 years 2 weeks ago
माननीय महोदय, शत-शत अभिनंदन! आपके कार्यों से हम सब आत्म विभोर हैं। ईश्वर आपको और सामर्थ्य प्रदान करें जिससे आप इसी प्रकार भारत का अभ्युदय करते रहे। # कुछ विनम्र तथा महत्वपूर्ण सुझाव 1) जल शोधन के लिए विषैली क्लोरीन के स्थान पर एंजाइम का प्रयोग किया जा सकता है जो हमारा अनुभूत, परीक्षित है। 2) क्षय रोग (ट्यूबरक्लोसिस एंड पैराट्यूबरक्लोसिस) पर आधुनिक औषधियां अब काम नहीं करतीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी यह यह स्वीकार किया है। ये दवाएं लाभ से कहीं अधिक हानि पहुंचा रही हैं। सूक्ष्म स्वर्ण, गन्ने तथा सर्व विष से इसकी सुनिश्चित चिकित्सा पारंपरिक तकनीक द्वारा कर हम सकते हैं। यह हमारा परीक्षित प्रयोग है। 3) मधुमेह व चिकित्सा असाध्य नहीं। हमने पंचगव्य प्रयोग करके 90% रोगियों को स्वस्थ करने का अनुभव प्राप्त किया है। सुविधा प्रदान करें, हम यह करके दिखाएंगे। प्रमाणित होने पर राष्ट्रहित में व्यापक स्तर पर इन उपायों को सरकार द्वारा लागू किया जा सकेगा। और भी अनेक सफल प्रयोग हमने किए हैं। वह सब अवसर मिलने पर सहर्ष राष्ट्रहित में समर्पित करने को तत्पर हैं। सादर, वैद्य राजेश कपूर, सोलन।
Amit
Amit 4 years 2 weeks ago
Namaskar Sir, Various social and financial security initiatives has been taken by the government for general public, government has also provided mobile apps and websites for dissemination of information. I would like to draw your attention to the fact that in various apps and portal option to apply to such schemes does not appear and it forces the public to visit government offices , someone should visit each such apps as a general public and try to make it user friendly
Heena Desai
Heena Desai 4 years 2 weeks ago
Respected sir, I am very small in age to give suggestions but from my college hood I felt always that as in Singapore or Iran country our India should also has to give compulsory milatary training and 2 years compolsory work in any force before they do any job in any fild ..I was NCC cadet and I felt by this it will help so much in our society to respect our country and our janmbhumi... I am sorry if I spoke something wrong sir but as a citizen and my father had also serve his life to nation feel all should do so the feeling of our country can be generated and if in future if any bad situation like Ukrain happens then we get strong human being from our country it self Jay bharat Jay jawan Jai kisan Heena Desai Surat, Gujrat
Ranjan
Ranjan 4 years 2 weeks ago
उसपर नृत्य अश्लील न हो। कृपया इस सच्चाई को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए इसपर अमल करें और मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे कानून/ संविधान निर्माता इस विषय में कई विकल्प देने और लागू करने में समर्थ हैं। धन्यवाद।
Ranjan
Ranjan 4 years 2 weeks ago
ये लड़कियां धीरे धीरे अपने परिवार से दूर होती जा रही हैं। देश में महिलाओं के प्रति नकारात्मक एवं अश्लील सोच, छेड़छाड़, शोषण, बलात्कार इत्यादि के लिए हमारा सिनेमा जगत प्रमुख कारण है। छोटे छोटे बच्चों को भी जानें अंजाने में नग्नता एवं अश्लीलता देखना पड़ है चाहे वो फिल्म में हो, गाने में या प्रचार में। ऐसे में ये बच्चे क्या सीखेंगे, इनका मानसिक विकास किस ओर होगा, हमारी संस्कृति के बारे में ये क्या सीखेंगे, और क्या यही हमारे देश का भविष्य बनेंगे? इसका कारण कौन है?. प्यार जो की एक खूबसूरत एहसास है उसे अश्लीलता में परिवर्तित करके दिखाया जा रहा है। आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी सभ्यता की ओर बढ़ावा दिया जा रहा है। कुल मिलाकर ये सिनेमा हमारे समाज एवं संस्कृति को धीरे धीरे दीमक की तरह खाए जा रहा है और इसमें ये काफी हद तक कामयाब हो गया है। हमें जरूरत है बहुत सारे कठोर कदम उठाने की जिससे की ये नंगापन दूर हो सके, हमें कोई जरूरत नहीं है किसी भी प्रकार की A, A/U, U प्रमाण की, क्योंकि हमें सिर्फ वही सिनेमा चाहिए जो शुद्ध हो, जिसे पूरा परिवार साथ बैठ देख सके, जिसकी पटकथा नई हो, जिसके गाने नये हों पर(२/३)
Ranjan
Ranjan 4 years 2 weeks ago
नमस्कार प्रधानमंत्री महोदय! मैं आज आपका ध्यान हमारे देश के सिनेमा की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। आज के भारतीय सिनेमा में, चाहे वो किसी क्षेत्र विशेष की हो या फिर बाॅलीवुड की, सभी में कूट कूट कर नंगापन, अश्लीलता, रिश्तों में गिरी हुई मर्यादा, नारियों का वास्तुकरण, नारियों के ऊपर पुरुष का वर्चस्व, नशे का सेवन, पैसों का ग़लत इस्तेमाल, ग़लत परवरिश आदि के अलावा और कुछ भी नहीं दिखाया जा रहा है। किसी भी फिल्म में कोई ढंग की पटकथा नहीं रहती और ज़्यादातर फिल्मों में पटकथा मिलती जुलती रहती है। आज भारतीय सिनेमा में सिनेमा की जगह पैसे, बल, रौब, नंगेपन, भाई भतीजावाद, अश्लीलता, भ्रम, नकारात्मक विचारधारा आदि ने ले ली है। और ये हर एक भारतीय को पता है, पर वो इस सच्चाई से मुंह मोड़ रहा है, खासकर हमारी युवा पीढ़ी जो अपने आप को अत्यंत ज्ञानी दिखाने में एवं ज्ञानी समझने के चक्कर में वही काम कर रहे हैं जो ये फिल्म निर्माता, निर्देशक और पर्दे के पीछे बैठा हुआ पूरा गैंग चाह रहा है। लड़कियां खुद को स्वतंत्र एवं आधुनिक दिखाने के चक्कर में नंगेपन की ओर जा रही हैं और इन्हें नंगेपन की परिभाषा भी चाहिए (१/३)