प्रारंभ तिथि
24/09/2026 - 15:00
अंतिम तिथि
30/09/2026 - 23:45
Time zone: IST (GMT +5.30 Hrs)
बंद सबमिशन
निर्मित:
24/09/2026
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Tune in to 138th Episode of Mann Ki Baat by Prime Minister Narendra Modi on 27th September 2026
Prime Minister Shri Narendra Modi addresses the nation through his Radio Address, Mann Ki Baat. This month's episode sees citizens from various corners of the nation addressing their questions and suggestions to PM Modi. #mannkibaat #pmmodi #narendramodi
1 month ago
Respected Sir,
27th September being my birthday, I would like to share one idea I have about my beloved country.
Now, the Govts face problems in providing basic amenities to the nook and corner of the country. It becomes difficult to provide roads, Healthcare, education and other social security measures to the entire population. As a result, only those in cities get access to all these, apart from.work, and so there is large migration to cities and creation of slums etc.
I suggest that, on pan-india basis, consolidation of villages/ hutments/settlements may be done into identified centralised accessible areas. These identified areas to have good schools/hospitals/markets/governance systems resulting in access to all amenities by the inhabitants. Such areas are to be identified in all parts of India, ensuring feasibility for the relocated farmers to access their fields. This'll protect the environment too. Land ownership may be given to the displaced against their lost homestead.
1 month ago
माननीय प्रधानमंत्री जी,
मेरा यह मानना है कि शायद सभी तरह व कीमत के मोबाईल टेलीफ़ोन पर एक रेट से ही GST लगाया जाता है। यह शायद ठीक नहीं लगता है। क्योंकि बहुत महंगे मोबाइल सैटस Luxury items के दायरे में आने चाहिए व उन पर ऊँची दर का GST रेट लगना चाहिये । इससे सरकार को टैक्स में फायदा होगा। मेरे विचार से कोई भी मोबाइल जो कि एक लाख से अधिक कीमत का होता है तो वह luxury item की लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिये व ऐसे सभी मोबाइल सैट पर ऊँची दर का GST लगना चाहिये । ऐसा करने से देश के राजस्व को लाभ होगा व ज़्यादा महँगे मोबाइल सैट की बिक्री पर नियंत्रण ही नहीं बल्कि जो ज़्यादा पैसा खर्च कर सकने का सक्षम होगा व देश के ज़्यादा राजस्व देने के लिए भी सक्षम होना चाहिए ।
मेरे सुझाव पर जरूर विचार करना। जय श्री राम ।
1 month ago
VANDE MATRAM !
1 month ago
Honourable Shri Modi ji, DESH KO AAP PAR GARVA HAI ! I have a few humble suggestions for discussions with your respective ministry committees : 1. In my opinion, government should have full monitoring control of the Space Industry if it is partly & not fully privatized, since it is a highly strategic sector. 2, As a repercussion of China's ongoing build up across Arunachal Pradesh, I would humbly request the government to consider the idea of inviting European or American companies in the Renewable Energy Sector to build up infrastructure across Arunachal Pradesh in projects such as Solar Power, Hydropower, or Wind Power in such a way that our Economic & Sovereign interests are fully protected (NO COMPROMISE WITH OUR ECONOMY OR DEFENCE SECTOR). THIS WOULD DETER CHINA BECAUSE THIS WOULD THEN BE OUR 'ECONOMIC SHIELD CORRIDOR' FOR FUTURE - A CHANAKYA-NITI BLUEPRINT.
1 month ago
how to study without getting distracted
1 month ago
माननीय प्रधानमंत्री जी,
देश भर में बाढ़ की वजह से त्राहि त्राहि मची हुई है। इसका मुख्य कारण जो मेरी समझ में आता है वह इस प्रकार है
1. ज़्यादातर नदियाँ समतल या कुछ आठ-दस फ़ीट की गहराई से बह रही हैं ।
2. नदियों में गाद (silt) भरी रहती है जिसको सफ़ाई करने का कोई ठोस इंतज़ाम नहीं है ।
3. वास्तव में नदी, नहरें व नाले उचित गहराई में बहने चाहिए। नदियों के बैड की संरचना व दोनों तटों पर 15-20 ‘ ऊँचा पुसते का एक नक़्शा संलग्न है ।
4. अगर बाढ़ से प्रभावित नदी,नहर व नालों की संरचना ऐसे बनी हो तो लोगों को बाढ़ के प्रभाव से राहत दिलाई जा सकती है ।
5. देहली से गुज़रती यमुना जी की वर्तमान संरचना से ही मेरा सुझाव अपने से ही ज़मीनी हालात स्पष्ट करने में सक्षम है । जो नदी ख़तरे के निशान से ऊपर बही जाती दिखाई जाती है वह केवल तह से मुश्किल से 10-12 फ़ीट ही होती है।
इस गंभीर समस्या पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की ज़रूरत है ।
1 month ago
पिछले मेसेज से आगे
ऐसे ही कुछ संस्थान जो कि नोर्थ व पुर्व देहली में स्थित है परन्तु पुरी तरह से उनकी वहाँ जरूरत नही है, उन्हें ऐसे ही कहीं दूर शिफ़्ट करे व उस जगह पर बच्चों के लिए होस्टल बनाया जाना चाहिए । परन्तु उसके बनाने व रखरखाव के लिये सामाजिक व शैक्षणिक संस्थाओं को ही सौंपा जाना चाहिये।
ऐसे ही मध्य देहली में भी ऐसा ही कोई स्थान तलाश कर उसे बच्चों के होस्टल में डेवलप करने पर विचार करने की जरूरत है।
ज़रूर विचार किया जाना चाहिए ।
1 month ago
देहली जैसे शहर में आसपास के प्रांतों से बच्चे स्कूल व कालेज व कोचिंग के लिए बहुत संख्या में आते है। ऐसे सभी विद्यार्थियों व बच्चों के लिए ठहरने की कोई सुचारु सुविधा नहीं होती है। ज़्यादातर स्कूलों, कालेजों व कोचिंग सेंटर के संचालकों के पास बाहर से बच्चों के लिए होस्टल की कोई सुविधा नहीं होती है।
मेरा सुझाव है कि सरकार को कुछ मान्यता वाली सामाजिक व शैक्षणिक संस्थाओं को सस्ते दामों पर ज़मीन का आवंटन करना चाहिए व ऐसी संस्थाओं को No Profit No loss के बेसिस पर पढ़ने वाले बच्चों को वाजिब दाम पर होस्टल व साफ़ सुथरा सात्विक भोजन देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ।
मेरा सुझाव है कि साउथ दिल्ली में स्थित जवाहर लाल युनिवर्सिटी के पुरे कैम्पस को युवाओं, बच्चों व महिलाओं के होस्टल के लिए तबादला कर देना चाहिये। जवाहर लाल युनिवर्सिटी जिसका माहौल वैसे भी बदहाल व नक्सल वादी होता जा रहा है उसे देहली से क़रीब 100 किलोमीटर दुरी पर जैसे हरियाणा, उतर प्रदेश या राजस्थान के किसी गाँव या शहर के आसपास नए कैम्पस में शिफ़्ट करने के बारे में विचार करना चाहिये!
कृपया बाक़ी संदेश अगले मेसेज में देखें
1 month ago
Suggestion for Man Ki Baat
(0.44 MB)
1 month ago
सेवा में,
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार, नई दिल्ली
विषय: देश भर में आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं के लिए 'पुलिस पायलट एवं स्मार्ट ट्रैफिक क्लीयरेंस प्रणाली' लागू करने हेतु सुझाव।
सादर प्रणाम।
मैं इस पत्र के माध्यम से देश की आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ी एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील समस्या की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। हमारे देश के कई राज्यों एवं शहरों में प्रतिदिन हज़ारों एम्बुलेंस गंभीर स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुँचाने का प्रयास करती हैं। हालाँकि, सड़कों पर बढ़ते भारी ट्रैफिक, संकरे मार्गों और आम जनता में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर एम्बुलेंस ट्रैफिक जाम में फंस जाती हैं।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार आपातकालीन मामलों में 'गोल्डन आवर' (घटना या गंभीर स्थिति के बाद का पहला घंटा) अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। यदि इस समय के भीतर मरीज को सही और त्वरित इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके विपरीत, एम्बुलेंस के जाम में फंसने से हुआ एक-एक मिनट का विलंब अक्सर मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है।