Home | MyGov

Accessibility
Accessibility Tools
Color Adjustment
Text Size
Navigation Adjustment
Screen Reader iconScreen Reader

How will you celebrate #BapuAt150?

Start Date :
Mar 08, 2019
Last Date :
May 31, 2019
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

2019 is the year of Bapu’s 150th Birth Anniversary. What do the teachings and work of the Mahatma mean to you? How will you inculcate Bapu’s work in your daily life and ...

2019 is the year of Bapu’s 150th Birth Anniversary. What do the teachings and work of the Mahatma mean to you? How will you inculcate Bapu’s work in your daily life and celebrate this year? How will you put Bapu’s thoughts into action in your home, your community and society at large and make #Bapu150 a mass movement? Share your stories, thoughts and ideas here!

Reset
Showing 3015 Submission(s)
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
क्या हम वास्तव में खुद के अंदर शांति को तलाशने की कोशिश करते है? ज्यादातर लोगो का जवाब होगा, ‘नहीं’. क्योकि असल में हम अपनी पूरी जिंदगी शांति को बाहर तलाशते रहते है। जैसे की हम जिंदगी में पहली बार किसी से मिलते है तो हम उनके विचारो को इतनी गंभीरता से ले लेते है जिससे हमारा अपने उपर से विश्वास हट जाता है और हम अपने आपको दूसरो की नजरो से देखने लग जाते है। लेकिन असल में हमें बाहरी आवाजो को अनसुना कर के अपनी अंतरआत्मा की आवाज़ को सुनना चाहिये।
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
महात्मा गांधी एक मजबूत चरित्र वाले आदमी थे। वह भारत की आज़ादी के लिये ऐसी कोई भी विधि नही अपनाना चाहते थे जिनसे उनकी अंतरआत्मा को ठेस पहुचे। इसीलिए उन्होंने भारत को आज़ाद करवाने के लिये हिंसा का सहारा न लेते हुए अहिंसा का सहारा लिया था। हमें भी उसी तरह अपने लक्ष्य को पाने के लिए एक नैतिक मार्ग का सहारा लेना चाहिये। तभी हम अपने लक्ष्य को हासिल कर पायेंगे।
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
महात्मा गांधी ने कभी हार नही मानी, अपने जीवन में वे कई बार जेल गये लेकिन उन्होंने देश की आज़ादी के लिये संघर्ष करना कभी नही छोड़ा। उन्ही की तरह हमें भी अपने लक्ष्य को पाने के लिये लगातार संघर्ष करते रहना चाहिये। क्योकि जब तक हम सफलता पाने के लिये संघर्ष नही करेंगे तब तक हमें सफलता मिलेगी ही नही। और संघर्ष करते रहने से ही हम अपने सपनो को साकार कर सकते है और सफलता हासिल कर सकते है।
Akash Oswal
Akash Oswal 6 years 11 months ago
Our Prime minister is already announced “House for all” till 2022 for this scheme we can develop new model of “PDD(Public Donetion for Development)” under which we start championing under title “Donate One Sq/ft”. For this scheme government will provide land for free housing and for construction we will take donations from public under “Donate One Sq/ft” as my hope public have trust in your style of work so we can get tremendous responses from public so that we will achieve target before time.St
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
गाँधी जी ने अपनी इस छोटी से उम्र में झूठ न बोलने की शिक्षा ग्रहण कर ली थी. ऐसी ही आवाज हमारे अन्दर भी आती है जब हम किसी से झूठ बोलते है किन्तु हम उस आवाज पर Belive नहीं करते और इसे नजरंदाज करके हम सबसे बड़ी गलती कर देते है. हमें अपने जीवन में कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि झूठ का कोई वजूद नहीं है और इससे हम किसी और को नहीं बल्कि खुद को ही धोखा देते है.
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
मांस वह खाता है जो मांसाहारी होता है और जिसके दांत मांस खाने के लिए बने होते है. जब हम किसी भी जानवर का मांस खाते है तो हम भी कही न कही उस जानवर की मौत के जिम्मेदार होते है. इसलिए हमें हिंसा को त्यागकर अहिंसा को अपनाना चाहिए और मांस का त्याग करना चाहिए.
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
गाँधी जी के ज़माने में छूआछूत का बोलबाला था. हमें गाँधी जी के इस प्रसंग से यह सीख अवश्य लेनी चाहिए की हम कभी भी किसी के साथ छूआछूत नहीं करेंगे. ऐसा करने पर हम किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि मानवता का दिल दुखाते है जो बिलकुल भी उचित नहीं. इसलिए छूआछूत का विरोध करे और इसे अपने जीवन से जड़ से उखाड़ फेंके.
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
हरिजन के 2 मई 1936 के संस्करण में गांधी ने बड़े ही साफ लब्जों में कहा था कि मेरा दृढ मत है कि इस देश की सही शिक्षा यही होगी कि स्त्री को अपने पति से भी 'न' कहने की कला सिखाई जाए. उसे यह बताया जाए कि अपने पति की कठपुतली या उसके हाथों की गुड़िया बनकर रहना उसके कर्तव्य का अंग नहीं है. उसके अपने अधिकार हैं और अपने कर्तव्य हैं.
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
यंग इंडिया के 21 जुलाई 1921 के संस्करण गांधी ने यह भी लिखा था, 'मैं इसकी कल्पना नहीं कर सकता कि सीता ने राम को अपने रूप-सौंदर्य से रिझाने पर एक पल भी नष्ट किया होगा.' गांधी की नजर में स्त्री की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने तब लिखा था, 'यदि मैंने स्त्री के रूप में जन्म लिया होता तो पुरुषों के इस दावे के खिलाफ विरोध कर देता कि स्त्री उसका मन बहलाने के लिए ही पैदा हुई है.'
Mitul Kansal
Mitul Kansal 6 years 11 months ago
गांधी ने लिखा था, 'आदमी जितनी बुराइयों के लिए जिम्मेदार है. उनमें सबसे घटिया नारी जाति का दुरुपयोग है. वह अबला नहीं, नारी है.' उन्होंने आगे लिखा था, 'स्त्री को चाहिए कि वह खुद को पुरुष के भोग की वस्तु मानना बंद कर दे. इसका इलाज पुरुषों के बजाय स्त्री के हाथ में ज्यादा है. उसे पुरुष की खातिर- जिसमें पति भी शामिल है, सजने से इनकार कर देना चाहिए. तभी वह पुरुष के साथ बराबर की साझीदार बनेगी.'