Suneel Kohli
11 years 2 months ago
आपके "मन की बात"Program को सुना व छिपे दर्द को महसूस भी किया।आप अपने सम्बोधन में जब भी मौक़ा मिले तो यह समझाए कि परिवार में केवल पिता ही वह शक्स है जो यह चाहता है कि मेरा बेटा मुझसे आगे बढ़े।ओर यह तभी सम्भव होगा जब बच्चे अच्छे से अच्छा काम करेंगे। क्योंकि यही अकेला रिश्ता है जहाँ किसी भी प्रकार की ईर्ष्या जन्म नही लेती है। आज मै अपने पिता के नाम से जाना जाता हू पर भविष्य में जब मेरे नाम से मेरे पिता को जाना जायेगा तो आप सोच सकते है कि इस सम्मान व इज़्ज़त की क़ीमत क्या कोई चुका पायेगा। शायद कई नही।
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