
Creative Corner
Created : 3/01/2025
निकामे निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो न ओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम् ।। (यजुर्वेद 22.22) अर्थात- हम जब-जब इच्छा करें, मेघ जल की वर्षा करें। अब जो इस विद्या में (सिंचाई कराने में) कुशल हो, उनका देश एवं राष्ट्र को सम्मान करना चाहिए।