राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के लिए लोगो डिजाइन प्रतियोगिता

उत्पादों पर चयनित लोगो/मार्क का उपयोग यह प्रमाणित करने के लिए किया ...

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उत्पादों पर चयनित लोगो/मार्क का उपयोग यह प्रमाणित करने के लिए किया जाएगा कि निर्माता ने भारतीय कानून के तहत 'एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) दायित्वों का अनुपालन किया है। अत: प्रतिभागी एक ऐसा डिजाइन प्रस्तुत करेंगे जिसका उत्पादों पर लोगो के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है जिसे केंद्र सरकार द्वारा जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों को लागू करने के लिए 2003 में स्थापित किया गया था। इसका मुख्यालय तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित है। एक सांविधिक निकाय के रूप में एनबीए संरक्षण, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और जैविक संसाधनों के लाभों का उचित और न्यायसंगत बंटवारे के मुद्दे पर भारत सरकार हेतु विनियामक और सलाहकार का कार्य करता है। एनबीए भारत के जैविक संसाधनों और / या देश में उससे संबंधित ज्ञान के अनुसंधान, वाणिज्यिक उपयोग, जैव-सर्वेक्षण और जैव-उपयोग जैसी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। यह भारतीय जैविक संसाधनों या संबंधित ज्ञान के आधार पर आविष्कारों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों की मांग करने वाले व्यक्तियों को अनुमोदन प्रदान करता है। अत: वे कंपनी, संस्थान और व्यक्ति, जो जैविक संसाधनों और / या उत्पादों को विकसित करने और पेटेंट प्राप्त करने के लिए संबंधित ज्ञान का उपयोग करते हैं, इस तरह की गतिविधियों को प्रारंभ करने से पहले एनबीए की मंजूरी लेंगे। अनुमोदन प्रदान करने के समय कंपनी या व्यक्तिगत लाभ का एक निश्चित प्रतिशत एनबीए के साथ साझा करने को कहा जाता है। इस तरह से साझा किए गए लाभों का उपयोग जैव विविधता के संरक्षण और संवर्धन, संसाधन के संरक्षण में शामिल समुदायों को प्रोत्साहित करने और संसाधन प्रदान करने वाले क्षेत्रों के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए किया जाएगा। एनबीए अब एक लोगो / चिह्न विकसित करने की योजना बना रहा है जिसका एनबीए से अनुमोदित कंपनियां या व्यक्ति अपने उत्पाद पर इस्तेमाल कर सकते हैं। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के संबंध में अधिक जानकारी वेबसाइट http://nbaindia.org/ पर देखी जा सकती है। इस संबंध में एनबीए द्वारा लोगो प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की जाती है।

चिह्न/लोगो का डिजाइन करते वक्त प्रतिभागी इन बातों का ख्याल रखें-

1. लोगो/मार्क का डिजाइन विशिष्ट हो और जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के इन तीनों उद्देश्यों को व्यक्त करता हो - जैविक विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का स्थायी उपयोग और इसके उपयोग से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण।
2. यह लोगो 'एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS)' की अवधारणा को प्रतिष्ठित करे, जो उपयोगकर्ताओं (कंपनियों / संस्थानों / उद्योग) द्वारा जैविक संसाधनों के प्रदाताओं (समुदायों / किसानों / पारंपरिक ज्ञान धारकों) में लाभों के समान बंटवारे को दर्शाए।
3. इस मार्क का इस्तेमाल कंपनियों द्वारा प्रचार के लिए किया जा सकता है कि उनका उत्पाद भारत के जैविक संसाधन और / या उससे जुड़े ज्ञान पर आधारित है।
4. यह चिह्न प्रमाणित करेगा कि जिस उत्पाद पर यह लगा है वह भारतीय कानून के तहत एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) की आवश्यकताओं का अनुपालन कर रहा है।
5. इस निशान के आधार पर उपभोक्ता उत्पादों का चयन कर सकते हैं जो इस बात का आश्वासन होगा कि उत्पाद का निर्माण भारत के जैविक संसाधनों और / या संबंधित ज्ञान का उपयोग करके किया गया और यह भारतीय कानून के तहत ABS आवश्यकताओं को पूरा करता है।

चयनित लोगो के डिजाइनर को 50,000 रु - (केवल पचास हजार रुपए) का पुरस्कार मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को डिजाइन का कॉपीराइट देने की आवश्यकता होगी। (टीडीएस की कटौती के बाद पुरस्कार राशि देय होगी)।

प्रविष्टियां स्वीकार करने की अंतिम तिथि 21 जनवरी, 2019 शाय: 06.00 बजे तक है।

नियम और शर्ते पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

किसी भी प्रश्न के लिए लिखें:
श्री नरेंद्रन टी
तकनीकी अधिकारी (IPR)
दूरभाष: 044-22542777 / 1075
ई-मेल: toipr@nba.nic.in

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