उपभोक्ता संरक्षण और आंतरिक व्यापार

उपभोक्ता संरक्षण के स्तर को सार्वभौमिक रुप से देश में प्रगति के स्तर के महत्वपूर्ण सूचक के रुप में स्वीकार किया जाता है। उपभोक्ता संरक्षण का न्यूनतम स्तर, उम्मीदों और आवश्यकताओं पर जवाबदेही को किसी भी सभ्य समाज का एक अनिवार्य पहलू माना जाता है। इस आवश्यकता को समझते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1985 में उपभोक्ता संरक्षण के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए और उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम देश में 1986 में अधिनियमित किया गया था। उपभोक्ताओं का संरक्षण करते हुए हम, व्यापारियों के मुद्दों को नजरअंदाज नहीं कर सकते जो बढ़ती हुई सतत अर्थव्यवस्था के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, देश में व्यापारिक गतिविधियों के नियमन में उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के वास्तविक मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है। इस समूह का निर्माण उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा उठाए गए कदमों पर सभी हितधारकों के विचार/सुझाव विकसित करने और चर्चा करने के लिए गठित किया गया है।