Gandhi@150 के अवसर पर समारोह

Last Date Oct 02,2019 17:00 PM IST (GMT +5.30 Hrs)

जिस महान व्यक्तित्व ने पूरी दुनिया को बताया कि सौम्यता व विनम्रता से ...

जिस महान व्यक्तित्व ने पूरी दुनिया को बताया कि सौम्यता व विनम्रता से दुनिया बदली जा सकती है। उनकी 150 वीं जयंती के साथ एक नई शुरुआत की जा रही है। वे अपने पीछे नैतिकता, आत्मसम्मान, क्षमा, अहिंसा और सत्याग्रह आदि की विरासत छोड़ गए हैं। अब दुनिया तेजी से विकसित हो रही है और सभी के सतत और समावेशी विकास के लिए कुछ पहलूओं पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

गांधी स्मृति और दर्शन समिति इस डिजिटल मंच पर आपको खुली चर्चा के लिए आमंत्रित करती है जहां आप अपने बहुमूल्य विचारों को साझा कर सकते हैं।

इन विचारों को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह के लिए समर्पित विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन में समिति द्वारा उपयोग किया जा सकता है।

भेजने की अंतिम तिथि अक्टूबर 2, 2019 शाम 5 बजे तक है।

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OMPRAKASH SINGH CHAUHAN 10 मिनट 34 सेकंड पहले

Working as a trusty of all people for the common cause of uplifting the standard of life of all needs more attention and implementation today when selfish interest of individuals have made the principle of trusteeship redundant. We need to find icons of this temperament and promote this culture for percolating down to common people. The celebration of Gandhi ji lies in propagation of his ideas relevant to present.

1970
varsha sajane 43 मिनट 23 सेकंड पहले

hamen Gandhiji ke vicharon ko duniya ke samne lana hai tu to hamen main pahle a bacchon se ki uski shuruaat karni chahie. jaise ki school ke bacchon ko Gandhiji ke bare mein main aur unke vicharon ke ke bare mein main Bata kar unako sahi Aakar de sakate hai. usake liye. school main Gandhiji ke par essay competition and quiz aur perfomance base competition rakahana chahiye. agar hum baccho ke rip Mai niv badhiya rakhenge to aage jakar ye bacche sahi Mai unake vivharonko jinda rakhenge

4320
SUNIL KUMAR 44 मिनट 19 सेकंड पहले

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

आज देश में एक शिक्षा नीति न होने के कारण इंग्लिश मीडियम विद्यालयों को शिक्षा का अंग्रेजीकरण करने की स्वतंत्रता मिली हुई है जहाँ अपने ही देश का इतिहास संस्कृति सामाजिक अध्ययन जैसे विषय का शिक्षण भी मातृभाषा / राष्ट्रभाषा में होने की अपेक्षा इंग्लिश में होता है
अंग्रेजियत की यह पराधीनता अंगेजों की पराधीनता से भी अधिक कष्टदायक है भारतीय भाषाएँ आज अपने ही देश में तिस्कृत और अपमानित हैं
अपनी वर्तमान स्थिति पर भारत माँ अश्रु बहा रही है

जय विश्वास जय भारत
भवतु सब्ब मंगलम्

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nikhil kumar 1 घंटा 49 मिनट पहले

Ok, We're going to celebrate 150th birthday of Gandhi ji. So, How many people of current generation follow his ideology. Many in the villages still don't know him. People like Violence because it gives them satisfaction,it may satisfy you for short term but not for long term.Gandhi ji knew this things so he chose non violence as his weapon.He shown an example of peace to the world. His dream was to make smart village instead of smart city.People should read his book 'My experiment with truth'.

600
Prachi chetankumar Gajjar 2 घंटे 30 मिनट पहले

Respected PMO, Namaskar..Myself Dr. Prachi Gajjar Dermatologist from Government medical college Bhavnagar Gujarat.
I recently watched movie " Tashkent Files" and came to know about out late 2nd PM Shashtrijis unsolved death mystery.First of all i request you to bring changes in our history books to include all the true hidden leaders who fought for our country....because i felt ashamed of myself of knowing nothing about shashtriji.also felt more ashamed of congress party who ignored his mystery

650
PARSARAM MALI 2 घंटे 34 मिनट पहले

गांधीजी का सम्मान करने के लिए, हमें अपने देश की मूल भाषाओं में बात करनी चाहिए। यह इंग्लैंड नहीं है !!! हमारे देश में कोई अंग्रेजी नहीं !!! हमारे देश में, अंग्रेजी को केवल अंतिम उपाय के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए। हमारे पड़ोसी चीन की तरह, उन्हें एक मानक के रूप में मंदारिन और कैंटोनीज़ जैसी देशी भाषाओं में बोलने के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए।

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pawer singh meda 2 घंटे 54 मिनट पहले

AHINSA SE JEET KAISE HASIL KARE, YE TO SHIRF GANDHIJI SE HI SHIKA JA SAKTA HAI. BESHAK AHINSHA ME HAME THODI TAKLIF JHELANI PADATI HAI, PAR ANT ME JEET HAMARI HI HOGI. AHINSHA AUR DUSHRO KE LIYE JINE KA MAJAA HI ALAG HAI. APNE LIYE TO SAB JITE HAI, DUSHRO KA SUKH DUKH , UNKE SATH SABHI KHUSIYA BATANA , ISKA ANAND AUR KAHI NAHI JITANA IS KAAM MAI HAI.

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darasingh yadav 3 घंटे 3 मिनट पहले

गांधीजी का सम्मान करने के लिए, हमें अपने देश की मूल भाषाओं में बात करनी चाहिए। यह इंग्लैंड नहीं है !!! हमारे देश में कोई अंग्रेजी नहीं !!! हमारे देश में, अंग्रेजी को केवल अंतिम उपाय के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए। हमारे पड़ोसी चीन की तरह, उन्हें एक मानक के रूप में मंदारिन और कैंटोनीज़ जैसी देशी भाषाओं में बोलने के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए।
darasingh