शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (एनपीएसटी) के मसौदे पर सुझाव आमंत्रित

Inviting suggestions on the draft of National Professional Standards for Teachers (NPST)
आरंभ करने की तिथि :
Dec 08, 2021
अंतिम तिथि :
Dec 17, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

एनईपी 2020 में की गई सिफारिशों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के लिए ...

एनईपी 2020 में की गई सिफारिशों के अनुसार, यह सुनिश्चित करने के लिए मानकों का एक सेट विकसित किया गया है कि स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सभी छात्रों को उच्च योग्य और पेशेवर रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाए।

राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (एनपीएसटी) करियर के विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों की विशेषताओं को निर्धारित करने में मदद करेगा। इसके अलावा, एनपीएसटी सभी शिक्षकों की तैयारी, अभ्यास और प्रदर्शन में सुधार के प्रयासों पर केंद्रित है। मानक और संबंधित नीतियां सभी को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए एनईपी 2020 में दिए गए मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप हैं। एनसीटीई को एनपीएसटी के संचालन के लिए मंच प्रदान करने और मार्गदर्शक दस्तावेज के तौर पर मंत्रालय द्वारा अनिवार्य किया गया है।

शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (एनपीएसटी), भूतपूर्व शिक्षकों के कार्यक्रम के डिजाइन की निगरानी करेगा। यह राज्यों द्वारा तभी अपनाया जा सकता है और शिक्षक कैरियर प्रबंधन के सभी पहलुओं को निर्धारित कर सकता है, जिसमें कार्यकाल, पेशेवर विकास प्रयास, वेतन वृद्धि, पदोन्नति और अन्य मान्यताएं शामिल हैं।

इस संबंध में, विभिन्न डोमेन के विशेषज्ञों से प्राप्त विचारों और सुझावों को शामिल करने के बाद एनसीटीई द्वारा एनपीएसटी पर एक मसौदा दस्तावेज निर्मित किया गया है। सभी हितधारकों से सुझाव और प्रतिक्रिया आमंत्रित करने के लिए मसौदा दस्तावेज 17 नवंबर, 2021 को जारी किया गया है।

शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (एनपीएसटी) का मसौदा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

कृपया अपने सुझाव (टिप्पणियां) 17 दिसंबर 2021 तक जमा करें।

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Bansi Mali 6 महीने 2 सप्ताह पहले

ભારત માટે સંપૂર્ણ ભારતીય શિક્ષા જરૂરી છે, જે મેકોલે અંગ્રેજે નષ્ટ કરી હતી, જેમાં ૧૮ વિષયનું મૂળ જ્ઞાન આપવામાં આવતું, કોઈ લેખિત પરીક્ષા નાં હતી પણ કાર્ય સોંપીને કુશળતા જોવામાં આવતી, જેથી કોઈ પરીક્ષાર્થી નહિ પણ વિદ્યાર્થી હતા, અને ભણતરમાં મળેલ જ્ઞાનનો જીવનમાં ઉપયોગ કરી શકતા, અને સરળ અને શ્રેષ્ઠ જીવન જીવી શકતા.... જય ભારત.....

88700
SATYA PRAKASH TRIPATHI 6 महीने 2 सप्ताह पहले

जितना प्रयोग शिक्षा विभाग में हो रहा है उतना किसी विभाग में नही।।यहाँ किसी योजना को बड़े जोर शोर के साथ लाया जाता है और रातों रात कायाकल्प की बात होंने लगती है। बिना परिणाम दिये ही उसे बीच मे ब्रेक दे दिया जाता है। उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा में पहले प्रथम संस्था,फिर निष्ठा, उसके बाद अरविंदो सोसाइटी ने सुधार के नाम पर करोड़ो रूपये लेंने के बाद सालभर में बिना किसी परिणाम के गायब हो गयी।।गुणवत्ता हेतु सुधार आवश्यक है। इसलियें यह होना चाहिये लेकिन सरकार की कड़ी निगरानी में नहीं तो वही ढाक के तीन