वित्तीय संसाधनों की बढ़ोतरी

Increasing Financial Resources
अंतिम दिनांकAug 11,2015 00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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यह चर्चा विषय ‘भारत में स्वास्थ्य प्रणालियां:मौजूदा निष्पादन और ...

यह चर्चा विषय ‘भारत में स्वास्थ्य प्रणालियां:मौजूदा निष्पादन और संभाव्यता के बीच की दूरी को कम करना’ शीर्षक से हमारी पहली चर्चा के सन्दर्भ अवं जारी रखने के लिए हैं । पहले चर्चा में इस विषय पर टिप्पणी की है जो दूसरों की समीक्षा करने के लिए, हमारे ब्लॉग पर उपलब्ध हैं ।

कैसे हम स्वास्थ्य के लिए वित्तीय संसाधनों में वृद्धि के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ को अधिकतम करें?

11वीं योजना अवधि के अंत में स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय, जीडीपी का 1.04% था। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य पर कुल व्यय का 70%, जेब से किया गया व्यय है। अध्ययनों से यह पता चला है कि भारत में स्वास्थ्य पर जेब से किए गए व्यय की वजह से गरीबी में संभवतः ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 3.6% और शहरी क्षेत्रों में 2.9% की वृद्धि हो रही है। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी व्यय तुलनीय देशों में सबसे कम व्यय करने वाले देशों की सूची में आता है। यह स्पष्ट है कि स्वास्थ्य के लिए और अधिक संसाधन जुटाने की जरूरत है। चूंकि स्वास्थ्य पर व्यय केवल केन्द्र सरकार के आबंटनों के माध्यम से ही होना जरूरी नहींहै, इसलिए अतिरिक्त निधियां जुटाने के लिए नए-नए तरीकों का भी पता लगाया जाना चाहिए। कृपया वर्किंग पेपर 2/2015 – स्वास्थ्य के लिए संसाधन बढ़ाना विषय पर विस्तृत पेपर देखें और स्वास्थ्य के लिए संसाधन बढ़ाने के अतिरिक्त तरीकों के संबंध में अपने सुझाव दें।

रीसेट
75 सबमिशन दिखा रहा है
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Chanchal MAl Chordia 6 साल 3 महीने पहले

No Extra Finance is Necessary for Health Department if Health Ministry Review the Health Policy & Encourage Most Effective Self Reliant Drugless Therapies:-
Why Government is Considering Allopathy as Original, Basic & Scientific and All other Systems of Treatment as Alternative. Government must clarify Parameters of Perfect Diagnosis, Effective Treatment, Correct Medicine & Good Medical Practitioner so that various Therapies can be compared at same level.

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varun nadheria 6 साल 3 महीने पहले

pradhan mantri ji,
aaj jaise yog ka prachaar aur prasaar ho reha hai aur puri duniya main aur wo bahut aacha hai, par apne heath system ki ek vidambana hai jahan ek taraf billions rupees govt yog par kharch kar rahi wahi dusari taraf rajasthan main govt hospitals main dialysis machine nahi hai aur hajaaro log roj dialysis naa karwane ki wajah se mar rahe hai kyunki garib aadmi ke pass paisa nahi hai,ki wo private hospitals main dialysis karwa sake .

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SUNIL OSTWAL 6 साल 3 महीने पहले

As at present at government hospitals in Karnataka, I have noticed that there are more than 300products reserved for Government Manufacturers such as Karnataka Antibiotics & Hindustan Latex. The Government is forced to give them orders for their reserved products at almost two - three times the rates available in market & barring them from participating in the Tender system. The Govt. of Karnataka are seeking funds from the Central for health to pay heavy prices for purchases from these entity