लघु वन उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन एवं विपणन के लिए नवीन विचार साझा करें

Give innovative ideas for value addition to the Minor Forest Produces and their Marketing
Last Date Jan 01,2015 00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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जनजातीय लोग तथा अन्य वन निवासियों की बड़ी संख्या लघु वन उत्पाद ...

जनजातीय लोग तथा अन्य वन निवासियों की बड़ी संख्या लघु वन उत्पाद (एमएफपी) जो उन्हें आवश्यक खाद्य, पोषण, चिकित्सीय आवश्यकताएं तथा नकद आय भी प्रदान करते हैं, के संग्रह एवं विपणन से अपनी आजीविका का स्रोत प्राप्त करते हैं। चूँकि लघु वन उत्पाद (एमएफपी) का व्यापार परंपरागत व्यापारो से अलग है इसलिए यह उन्हें देय लाभ नहीं देता है। जहां, सरकार ने कुछ लघु वन उत्पादों में निगमों और संघों के व्यापार का समर्थन किया है, वहीं इनकी बड़ी संख्या का बाजार में मुक्त रूप से व्यापार किया जाता है जो संग्रहकर्ताओ के लिए बहुत सहायक भी नहीं है क्योंकि लघु वन उत्पाद (एमएफपी) का उत्पादन स्थान की दृष्टि से अत्यधिक रूप से फैला हुआ है तथा इन क्षेत्रों में खराब पहुंच के कारण प्रतियोगी बाजार विद्यमान नहीं है। संग्रहकर्ताओ के लिए लघु वन उत्पादों हेतु उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वन उत्पाद (एमएफपी) के विपणन हेतु तंत्र तथा लघु वन उत्पाद (एमएफपी) के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास की नई योजना तैयार की है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय, मेरीसरकार(माईगव) के माध्यम से लघु वन उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन, एमएफपी के प्रसंस्करण एवं विपणन, परंपरागत कौशल एवं कौशल विकास इत्यादि के लिए नवीन विचारों के संबंध में समाज के सभी वर्गों से सुझाव/सूचना आमंत्रित करते हैं।

लघु वन उत्पाद संग्रहकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा का तानाबाना प्रदान करना

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192 सबमिशन दिखा रहा है
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Vishnu Singh Rathore 4 साल 6 महीने पहले

I am very distress to see this type of pics on this portal.
आप कैसे एक महान भारत का सपना देख सकते हैं।
क्या आप बीड़ी बनवा कर ,
नशा मुक्त भारत सोच सकते हैं।

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Bhagabata prasad panda 4 साल 6 महीने पहले

all the forest products & forest should be maintain by NGOs and by the group of nearer community. all the responsibilty should be given by the govt to those who are interested to do such task. there should be a good qualified leader in the group.

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bhanwarlal jat 4 साल 6 महीने पहले

Kisanon ki upaj kaa pura mulya milna chahiye
Japan or u.s.a. Ke kisanon ki fasal ko
Vaha ki sarkar bahut ache rate me samarthan mulya per kharidti hai or fir
Subside dekar des ke aam janta me supply kar ti hai
Esa kar ke des me kishani ki halat me sudhar kiya jaa sakta hai

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bHARAT 4 साल 6 महीने पहले

Scores of bicycles are thrown away or lie unused whereas many local people have no access to any kind of transport due to poverty.There should be a local charity, to be launched who collects bicycles and give to people in need to sell there produce in the market

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neeta kumar 4 साल 6 महीने पहले

country needs dustbins which are low cost, environmentally friendly and no one dare to steal- our North east produces bembu and good craft to make tokarees, why cant we install ethnic bembu dustbins purchased from NE states. i have ready model for the mutually beneficial system, but no government official is interested hearing that, requesting attention, so that clean india and tribal welfare does not seem a gimmik of government- neeta 9313195247

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Amit Shah 4 साल 6 महीने पहले

Development of tourist spots with nature and innovation, like floating market on river, tribal fun fair in forest with over night stay in camps or cottages. tourist-locals live together programmes. a camp about how to live,survive in forest with natural resources, forest festivals with lots of decorations, cultural dance etc...

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Vinod Agrawal 4 साल 6 महीने पहले

Attached are Letters to Shri Nitinji Gadkari and his further letters to Smt Nirmala Sitharaman and her replies on account of Discrepancy in Import & export of Gum Karaya and its adverse effects on Tribals on behalf of Adivasi Vikas Hakk Sanghatna.
https://drive.google.com/folderview?id=0B6iN6CjdrOxWfjNvN0gyOXRhYVhUN2Vv...

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Vinod Agrawal 4 साल 6 महीने पहले

Thus they have been saving a large amount of money by defrauding the government of its rightful income and custom duties.
This is evident by large amount of difference between the low import cost of superior quality of gum and high export cost of even the most inferior quality of gum which can be clearly verified from the import export data tables which can be found in links above.