भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन की क्या भूमिका होनी चाहिए, इससे संबंधित सुझाव दें

Suggestions on the role of the voluntary consumer organisations in tackling the menace of Misleading Advertisements
Last Date Jan 24,2015 04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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देशभर में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों का ...

देशभर में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों का प्रयोग किया जा रहा है। पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कमजोर वर्ग पर इसका दुष्प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ा है। इन क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनो की एक अहम भूमिका हो सकती है। देश के विभिन्न भागों में कार्य कर रहे स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन जिन्हें उपभोक्ता संबंधी मामलों से निपटने का अनुभव है, वह उपभोक्ताओं, राज्य सरकार, स्थानीय स्व-शासन की इन भ्रामक विज्ञापनों को पहचानने और उनपर उचित कार्रवाई करने में मदद कर सकते हैं।

भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन की भूमिका क्या होनी चाहिए इससे संबंधित सुझाव दें।

आप अपनी टिप्पणियां 23 जनवरी 2015 तक भेज सकते हैं।

भ्रामक विज्ञापनों के बारे में अधिक जानकारी यहाँ से प्राप्त करें-http://cdn.mygov.nic.in/bundles/frontendgeneral/pdf/brief-on-misleading-...

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Ravi Parthasarathy 4 साल 3 महीने पहले

A separate department is required to regulate the jewellery market who fleece the innocent public by charging people of making and wastage charges. There should be a body to assess the entire process of the industry and set standards for the industry so that the innocent (particularly the middle and lower middle class) are not misled and made to pay heavily. The Government should make it mandatory to follow the regulations set by the Govt including the quality of the product.

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Jayesh Varyani 4 साल 3 महीने पहले

To protect consumer rights process of filing complaint and resolution needs a drastic improvement.
Strict guidelines should be made to resolve cases under minimum time period
A separate department is needed that can act within 24 Hours of consumer grievance and help consumer to file complaint.
Review from consumers should also be taken regarding these departments.
And suo moto investigation should be taken up by government agencies to help consumer get redressal even in complex cases

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sangram singh 4 साल 3 महीने पहले

2.8 million people working in BPO. Private company outsource business from out of country. They are getting money in pound and they are giving very small money to the employer, Request you to please involve in this sector as this is a very big sector, If you will involve in this sector we can get more benefits. We are doing hard work but salary is too low.
Request you to please look into this and so the needful

27920
pooran jangir 4 साल 4 महीने पहले

Call Centers call the persons and give their false identification and try to cheat the people. They do ask account numbers, Addresses, References which must be STOPPED. To be precise I am quoting such calls from these numbers +911408930020, +911409305042, +911409964001, +911416551911 as an example. There might be lot of numbers from where innocent people might be cheated.
My request that a system should be displayed for their identification in a prerecorded voice. All talks to be recorded

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prashant gwaliory 4 साल 4 महीने पहले

देश के कई महत्वपूर्ण समाचार पत्र मेँ कई भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित होते हे जेसे गंजे सिर पर गोली के माध्यम से बाल उगाना ,गोली लेकर लंबाई बढ़ाना, गोली के माध्यम से लिंग के आकार मेँ वृद्धि करना , ऐसे अनेक भ्रामक विज्ञापन प्रिंट मीडिया के माध्यम से जन सामान्य के बिच जाते रहते हैं , ईस बारे में संगठनो के द्वारा बात रखी जाने पर उस पर कार्यवाही होना सुनीश्चीत करने के लिऐ जिला कलेक्टरो को सख्त निर्देश दीये जाने चहाईऐ , साथ ही जिले मे उपभोक्ता सरक्षण परीषद को सक्रीय करना चहाईऐ जो की मिलकर कार्य करे

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prashant gwaliory 4 साल 4 महीने पहले

स्वेच्छिक उपभोक्ता संगठनोँ को जिला स्तर पर कोचिंग, स्कूल ,कॉलेज ,मोहल्लो , कॉलोनीयो , मेँ जाकर गोष्ठियोँ के माध्यम से विज्ञापनो के संबंध मेँ जन सामानय को जागरुक किया जा सकता हे साथ ही इस संबंध मेँ उपभोक्ता संगठनोँ को उपभोक्ता मंत्रालय के साथ समन्वय करके काम करने की छूट मिले तो अच्छे परिणाम सामने आ सकते हे इस क्षेत्र मेँ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत करकर 1 उपभोकता संगठन कार्य कर रहा हे सरकार चाहे तो संगठन के साथ मिलकर अपनी बात नीचे के अंचल तक पहुंचा भी सकती हे वो उसके परिणाम भी उत्तम होंगे

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Swetha Kannan 4 साल 4 महीने पहले

Like a movie sensor board or TRAI why not implement Advertisement regulatory terms and conditions. But one thin movie sesor board I am not sure whether it is working properly or not . Since these days movies are very bad. Similaly traffice police can get the vehicle or heavy fine for Polluted vehicle. The vehicle which is not given for maintenance gives this pollution and cities are getting polluted and causing cancer. Similalry becuase of smokers others also getting cencer. This rules followed