बीआईएआरएसी (BIRC ) इनोवेशन चैलेंज अवार्ड के लिए प्रासंगिक विषय के लिए सुझाव आमंत्रित करना

Inviting suggestions for relevant theme for BIRAC Innovation Challenge Award
आरंभ करने की तिथि :
Jul 14, 2017
अंतिम तिथि :
Aug 16, 2017
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

बीआईआरएसी (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद) ...

बीआईआरएसी (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद) बायोटेक्नोलॉजी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, और भारत सरकार द्वारा स्थापित कंपनी अधिनियम, 2013 के धारा 8 के तहत 'नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनी' है और ये जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उद्योग-शिक्षा की साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की तरफ एक इंटरफ़ेस एजेंसी के रूप में काम कर रही है । पिछले पांच वर्षों में बीआईआरएसी(BIRC) ने कई योजनाएं, नेटवर्क और प्लेटफार्म शुरू किए हैं जो उद्योग-अकादमिक के साथ साथ नवाचार अनुसंधान के क्षेत्र में भी काम किया है। एक तरह से कहें तो फिलवक्त इस उद्योग में जो भी कमियां थी उसे दूर करने में मदद की है , कोशिश है कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से, नवाचार, उच्च गुणवत्ता, और सस्ती उत्पाद विकास की सुविधा प्रदान किया जाता रहें|

अधिक जानकारी के लिए आप लॉग ऑन कर सकते हैं: http://www.birac.nic.in/s

बीआईआरएसी ने बीआईएआरएसी इनोवेशन चैलेंज अवार्ड लॉन्च करने की योजना बनाई है, ये एक प्रतियोगिता होगी। इसके तहत एक समस्या के समाधान और उसका ब्रेकथ्रू करना होगा जो फिलवक्त अनसुलझा और अभेद्य है... यह पुरस्कार एक निर्धारित समय सीमा में समस्या को हल करने में मदद करेगा और एक सस्ते उत्पाद / समाधान विकसित करेगा जो वैश्विक उत्कृष्टता का होगा। चुनौती के लिए तैयार किए गए क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र के सशक्त विकास लक्ष्य (एसडीजी) जैसे अच्छे स्वास्थ्य और साफ सफाई को आकर्षित करने वाला हो। बीआईएआरएसी इनोवेशन चैलेंज पुरस्कार के लिए सुझाव देने वाले संकेतक हैं मसलन:

स्वास्थ्य: स्वस्थ जीवन और विशेष रूप से चिकित्सा प्रौद्योगिकी(उपकरण और निदान) में उत्पादों के विकास के माध्यम से समाज के कल्याण को बढ़ावा देना, खासकर जो भारत में स्वास्थ्य देखभाल चुनौतियों को कम कर सकता है । संकेत हैं: मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करना, संचारी रोगों की महामारियों को समाप्त करना।

स्वच्छता: सुनिश्चित करता है कि सभी समुदायों के लिए उचित स्वच्छता और साफ सफाई की व्यवस्था हो और खुले में शौच को खत्म करने की दिशा में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। मतलब स्वच्छता की व्यवस्था हर स्तर पर हो।

हम आपको उपर्युक्त क्षेत्रों के आधार पर इन विषयों में सुझाव देने के लिए आमंत्रित करते हैं, इसके तहत हम चाहते हैं क एक विश्वव्यापी उत्कृष्ट उत्पादों के लिए आदर्श विकसित कर एक चुनौती पेश किया जा सके , लेकिने हां समाधान ऐसा जो महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए एक सस्ता, तेज़ और प्रभावशाली हो

प्रस्तुत करने की आखिरी तिथि 15 अगस्त, 2017 है

रीसेट
98 सबमिशन दिखा रहा है
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gaurav kumar 5 साल 2 सप्ताह पहले

Dear sir
Kaam kuch bhi ho par mere sabhi deshwasio ki salary ek jaisi ho.Na koi gareeb na koi amir equal salary.wo bhi direct account mai.kuch aisa kar dijiye arakshan khatam ho jaye govt policies khatam bas log equal salaries ke sath kaam kare.Or kamyab log desh ko aage le jaye
Thanks

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Kapil Krishan 5 साल 2 सप्ताह पहले

1. How do we bring down the cost and prevalence of medical diagnostics at scale, so 80% of Indians are able to have an annual health assessment in 5 years? Is it possible to turn diagnostics into a commodity for key diseases, and de-link the regulations binding diagnostics with treatment?
2. What technologies and incentives will bring habit changes in open defecation to monitor and reduce its incidence? There maybe business opportunities in getting data on gastro-intestinal conditions at scale.

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Onkar Pandey 5 साल 2 सप्ताह पहले

As per a report published by Central Bureau for Health Intelligence (CBHI) in 2015, we have only 7 doctors per 1000 citizens. It get event more thin in the rural areas. With the advancement in computing technologies and use of deep learning (Artificial intelligence) for detecting diseases and assisting doctors world wide, India should focus on use of these technologies to endogenously develop the solutions as per our needs. We should promote collaboration between Biotech and IT/Software tech.

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Pullak Dasgupta 5 साल 2 सप्ताह पहले

Sir,history of Indian Classical music probably the oldest one. The ragas of our music have direct effect on human body & mind. Our Govt. may initiate for an Institution where our musical ideas from Vedic time may be taught. I am personally working on The influence of Indian music Ragas on human body &mind.

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DEVENDRA LINGOJWAR 5 साल 3 सप्ताह पहले

Sickle cell disease is reported since 1952 in India but villagewise data and community wise data is hardly avaiable in details including projects from NRHM. This is one such data, which will guide similar projects on SCD and related hemolytic anemia at village level.
Since SC, ST and OBC population is suffering with this genetic disorder, its a high priority area. In village based anemia assessment project permanent village health centers should be established with life long activity.

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DEVENDRA LINGOJWAR 5 साल 3 सप्ताह पहले

Specifically in child and maternal health, some of the good area can be reaching every village with basic health monitoring equipment. My area of research is hematology and field level monitoring of pregnant women is not 100% covered in all the villages. I propose few projects in this directions. Other supportive programs can be making it operational at every village level. Another area which is very much related to this is abortions and childhood mortality mortality related to viral etiology.