फास्ट ट्रैक इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया विनियमों के लिए सुझाव आमंत्रित

Suggestions Invited for Regulations for Fast Track Insolvency Resolution Process
Last Date May 08,2017 00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने श्री एन के भोला, क्षेत्रीय निदेशक ...

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने श्री एन के भोला, क्षेत्रीय निदेशक (उत्तर), एमसीए की अध्यक्षता में एक कार्य समूह का गठन इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी संहिता, 2016 के अंतर्गत दिवालियापन और परिसमापन प्रक्रिया के लिए नियमों और विनियमों और अन्य संबंधित मामलों पर अपनी सिफारिशे प्रस्तुत करने के जनादेश के साथ किया था। इस कार्य समूह ने पहले कॉर्पोरेट स्वैच्छिक परिसमापन प्रक्रिया के लिए मसौदा नियम बनाये थे। इन ड्राफ्ट्स के आधार पर और उन पर प्राप्त सार्वजनिक टिप्पणियों पर विचार करने और उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ़ इंडिया ने 31 मार्च, 2017 को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ़ इंडिया (वॉलंटरी लिक्विडेशन प्रोसेस) विनियम अधिसूचित किये हैं।

इस कार्य समूह ने अब फास्ट ट्रैक कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस ऑफ़ कॉर्पोरेट पर्सन्स के लिए मसौदा विनियम प्रस्तुत कर दिए हैं। यह विनियम एक निश्चित स्तर के नीचे की आय अथवा सम्पत्तियों वाले कॉर्पोरेट देनदारों अथवा ऋण की ऐसी राशि अथवा कॉर्पोरेट व्यक्तियों की ऐसी श्रेणियों पर लागू होंगे, जो केंद्र सरकार इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 55 (2) के तहत अधिसूचित करे। फास्ट ट्रैक विनियमन के तहत समाधान प्रक्रिया दिवालिया होने की तारीख से 90 दिनों की अवधि में पूरी की जाएगी जिसे कुछ परिस्थितियों में प्राधिकरण के अधिकारियों की अनुमति से 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

कोड की धारा 55 (2) के तहत, केंद्र सरकार ऐसी श्रेणियां अधिसूचित कर सकती है जिन पर फास्ट ट्रैक कॉरपोरेट दिवालियापन प्रस्ताव प्रक्रिया विनियम लागू होंगे। कार्य समूह ने फास्ट ट्रैक विनियम लागू करने के लिए कॉर्पोरेट व्यक्तियों की 3 श्रेणियां सुझाई है अर्थात छोटी कंपनियां, जैसा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 उपधारा (85) में उल्लिखित है, कंपनियां / एलएलपी जिसने 2 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि नहीं उधार ली है और डीआईपीपी अधिसूचना -180 (ई) दिनांक 17.02.2016 में परिभाषित स्टार्ट-अप।

फास्ट ट्रैक कॉर्पोरेट रेज़ोल्यूशन और पात्र कॉर्पोरेट व्यक्तियों पर मसौदा नियमों पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। तदनुसार, ड्राफ़्ट विनियमो के प्रत्येक प्रावधान पर टिप्पणियां आमंत्रित की जाती है। ड्राफ़्ट विनियम माईगोव पर यहां उपलब्ध हैं। सुझाव प्रस्तुत करने की आखिरी तारीख 8 मई, 2017 है।

फास्ट ट्रैक कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस ऑफ़ कॉर्पोरेट पर्सन्स पर ड्राफ़्ट विनियम पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पात्र कॉर्पोरेट ऋणदाताओं के लिए ड्राफ्ट अधिसूचना पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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Samar Sutradhar 3 साल 3 महीने पहले

Dear Honourable PM Sir, I am from West Bengal and I see that many people were invested their all money to the cheat funds and lost every things. In this context I request you, please keep an arrangement to finish the investigation in this regard on early basis, so that many people can get return their invested money very fast. Also request you, please keep an arrangement for refunding the invested money by selling their(Cheat fund's) properties.

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Rahul Chimanbhai Mehta 3 साल 3 महीने पहले

Respected PM,
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pls print law that a voter, in voterlist, can add his Facebook id, twitterid, sha1hash of his public key, his cellno, emailid etc and mention whether he wants to keep it open or confidential. The proposed law-draft is attached.

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Deepak Jhanwar 3 साल 3 महीने पहले

Kindly incorporate the following;
1. Such persons should be given minimum time period to make up the loss otherwise they should not be allowed to take loan from any other institutions.
2. Such property should be allotted to others on the basis of auction.
3. Before liquidation, person should be allowed to add more active partners for the benefit of the company.
4. The amount earned in auction should be first distributed to employees as salaries.
3.

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HIMANSHU RATHORE_6 3 साल 3 महीने पहले

Respected Sir,
plz look on the matter of insurance companies violence and our judicial system coz insurance companies only give the claim to rich peoples and only rich peoples get justice, coz ordinary peoples never had money to hire good lawyers, resulting that only rich peoples gets justice.

85860
JAGDISH PATHAK 3 साल 3 महीने पहले

In respect to GST, Hon. PM and hon. FM has made great effort to implement as early as possible in the interest of nation as well as public interest, I want to suggest that, the SGST, which should be passed by all the states, should be instructed to pass the act in assembly of state as early as possible,further, the rate GST is very important,it should be fixed at reasonable and statndard level,so that the without lossing the revenue, minimum rate can be fixed in large public interest,best wishes

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RAMESH 3 साल 3 महीने पहले

Present efforts to attach printing machine with EVMs to provide proof for voters about their choice of vote casted would be disastrous to the effort of curbing money for vote. How will we prevent any political party from taking the receipts from the masses as proof in return for the promised cash. we are creating a very big loop hole. Instead EC can provide a small screen in front of the EVM itself which will flash symbol for three seconds before the voter leaves the booth. Pls rethink

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Rahul Chimanbhai Mehta 3 साल 3 महीने पहले

We request PM to print Right to Recall MLA law-draft proposed by us at Right to Recall Party (to be registered). IMO, this draft is better than RTR MLA draft proposed by Shri Varun Gandhiji. For details, pls see https://fb.com/mehtarahulc/posts/10154357792041922 . sha1 = 733526a17f245211460a6ecd6ac6c2ab030fd331

30500
srinivas khanna 3 साल 3 महीने पहले

Action routed through financial institutions have a better compliance effect than through enforcement agencies. Reduce debt eligibility to Rs 1 crore for insolvency resolution process and make it cumulative for group companies thus weeding out the errant ones at the nascent stage.