क्या आप स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायकों के बारे में जानते हैं? हमें बताइए!

Know of Any Unsung Heroes of the Freedom Movement? Tell Us!
अंतिम दिनांकAug 15,2022 23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)

भारत की आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में, भारत की ...

भारत की आजादी का अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में, भारत की आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए भारत सरकार द्वारा कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जा रही है।

इस माईगव गतिविधि के माध्यम से, हमारा लक्ष्य इतिहास को फिर से समझना और अपने स्थानीय नायकों को स्वीकार करना है, जिनके संघर्षों को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पारंपरिक कहानियों में प्रमुखता नहीं मिली है। आइए अपने स्वतंत्रता संग्राम और इससे जुड़े गुमनाम नायकों के बारे में जागरूकता बढ़ाएं। यह समय है कि हम वीर गुंडाधुर, वेलु नचियार, भीकाजी कामा आदि जैसे सेनानियों के योगदान को भी जानें।

यह आपके लिए उस कहानी को बताने का मौका है जिसे आपको बताना चाहिए और उन स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने हमारे देश को स्वतंत्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सभी विवरणों के साथ कहानियों को साझा करें और हमारे साथ भारत की आजादी का अमृत महोत्सव मनाएं।

प्रविष्टियां कैसे जमा करें:
• सभी प्रविष्टियां www.mygov.in . के माध्यम से ऑनलाइन जमा की जानी चाहिए।
• प्रविष्टियां भेजने का कोई अन्य माध्यम स्वीकार नहीं किया जाएगा।
• गुमनाम नायकों की कहानी का उल्लेख करते हुए निम्नलिखित विवरण साझा करें ताकि हर कोई उनके बारे में जान सके:
1. नाम
2. आयु
3. पता
4. जिला
5. राज्य
6. स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के बारे में कहानियां
7. तस्वीरें (यदि कोई हो)
8. वीडियो/ऑडियो का लिंक (यदि कोई हो)

आइए भारत की आजादी के गुमनाम नायकों को पहचानें और उनका सम्मान करें!

प्रविष्टियां जमा करने की अंतिम तिथि 15 अगस्त 2022 है

रीसेट
3373 सबमिशन दिखा रहा है
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Prathamesh Bagal 21 घंटे 48 मिनट पहले

Bhikaji Cama
People may have heard her name on roads and buildings, but very few know who she was and what she did for India.Cama was not only a part of India's independence movement but also an iconoclast who stood for gender equality during the late 19th and early 20th centuries.She donated most of her personal belongings to an orphanage for girls. She also unfurled the Indian flag at the International Socialist Conference at Stuttgart in Germany, 1907.

3260
Prathamesh Bagal 21 घंटे 51 मिनट पहले

Khudiram Bose
Some might have heard his name as he was one of the youngest revolutionaries of India and is often discussed in history books. His contribution to the freedom struggle is also a significant one as he was just 18 years old when the British hanged him for his activities against the Raj.

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ashutosh shukla 1 day 2 घंटे पहले

मान्यवर
अपने भारत देश के युवा क़ृषि कार्य नही करना चाहता है, क़ृषि कार्य को बढ़ावा देना होगा,
क़ृषि कार्य के लिए युवा को प्रोत्साहित करना होगा,

सरकारी कर्मचारी का वेतन इतना है, उसको कम करना होगा, उनकी सुविधा कम करना होंगी,

सरकारी सेवा समाप्त कर, सभी कार्य टेंडर से करें,

2970
Gadicherlapranesh 1 day 3 घंटे पहले

Vinayak Narahari Bhave was born on 11 September 1895 in a small village called Gagoji (present day Gagode Budruk) in Kolaba in the Konkan region of what is now Maharashtra. Vinayaka was the eldest son of Narahari Shambhu Rao and Rukmini Devi. The couple had five children; four sons named Vinayaka (affectionately called Vinya), Balakrishna, Shivaji and Dattatreya, and one daughter. His father was a trained weaver with a rationalist modern outlook, and worked in Baroda. Vinayaka was brought up by

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ashutosh shukla 1 day 11 घंटे पहले

मान्यवर
भारत देश टेक्निकल में सबसे आगे आना चाहिए, युवाओ का आह्वान करना होगा, जिससे भारत देश टेक्निकल के दुनिया चीन जापान,अमेरिका को भी fail कर देगा,
गरीब बच्चे है उनके ऊपर सरकार को देखना होगा उनकी मस्तिष्क को देखना होगा, जिससे अविष्कार तगड़ा होगा,

मेरा यही विचार,

सरकारी कर्मचारी काम नही करते उनको प्राइवेट करना होगा, उनकी सारी सुविधा खत्म करना होगा, जिससे राज्य, देश मजबूत होगा,

4830
ashutosh shukla 1 day 11 घंटे पहले

मान्यवर
अपने देश में ऐसे युवा जो साइंटिस्ट, जो साइंटिस्ट नही है उनको मौका देना होगा जिससे नई खोज एक नई दिशा मिलेगी, जिससे कुछ न कुछ अविष्कार होगा,,

बीटेक - बायोटेक्नोलॉजी युवा को खोज का मौका देना होगा, कितने युवा बेरोजगार है,

कितने मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव है जो शिक्षित है, जिनको डॉक्टर के बराबर जानकारी है, उनके लिए भी विचार करना होगा,

1550
Deepak Subhash Vatamkar 1 day 20 घंटे पहले

यह दुर्गा भाभी हैं, वही दुर्गा भाभी जिन्होंने साण्डर्स वध के बाद राजगुरू और भगतसिंह को लाहौर से अंग्रेजो की नाक के नीचे से निकालकर कोलकत्ता ले गयी.

14अक्टूबर 1999 में वो इस दुनिया से गुमनाम ही विदा हो गयी कुछ एक दो अखबारों ने उनके बारे में छापा बस.

आज आज़ादी के इतने साल के बाद भी न तो उस विरांगना को इतिहास के पन्नों में वो जगह मिली जिसकी वो हकदार थीं और न ही वो किसी को याद रही चाहे वो सरकार हो या जनता.

ऐसी वीर वीरांगनाओं को हम शत शत नमन करते है।।