उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का कुशलता के साधन के रूप में उपयोग करना

Using Available Financial Resources as a Tool for Efficiency
Last Date Aug 11,2015 00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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यह चर्चा विषय ‘भारत में स्वास्थ्य प्रणालियां:मौजूदा निष्पादन और ...

यह चर्चा विषय ‘भारत में स्वास्थ्य प्रणालियां:मौजूदा निष्पादन और संभाव्यता के बीच की दूरी को कम करना’ शीर्षक से हमारी पहली चर्चा के सन्दर्भ अवं जारी रखने के लिए हैं । पहले चर्चा में इस विषय पर टिप्पणी की है जो दूसरों की समीक्षा करने के लिए, हमारे ब्लॉग पर उपलब्ध हैं ।

कैसे हम उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का कुशलता के साधन के रूप में उपयोग कर स्वास्थ्य लाभ को अधिकतम करें?

1. मुद्दे

1.1. स्वतंत्र रूप से कार्यान्वित, बहुत-सी स्कीमों और वर्टीकल कार्यक्रमों की वजह से व्यय का विखण्डन हो रहा है जिसके फलस्वरूप दोहराव और अनावश्यक व्यय हो रहा है।

1.2. राज्य के स्वास्थ्य बजटों में प्राथमिक देखभाल को कम प्राथमिकता दी जाती है जबकि साक्ष्य यह दर्शाता है कि प्राथमिक देखभाल में अधिक निवेश के फलस्वरूप, देखभाल के उच्चतर स्तरों में निवेश की तुलना में, बेहतर लाभ मिलता है।

1.3. मौजूदा निजी बीमा स्कीमों में सेवा प्रदाताओं के लिए भुगतान हेतु “सेवा के लिए शुल्क” पद्धति के फलस्वरूप अनावश्यक उपचार किए जाते हैं जिससे लागत बढ़ जाती है।

1.4. मौजूदा बीमा स्कीमों में बीमा मध्यस्थों की वजह से संचालन की उच्च लागतें शामिल हैं।

1.5. मौजूदा बीमा स्कीमों में प्रदाता द्वारा अभिप्रेरित मांग को नियंत्रित करने की असमर्थता है।

1.6. मौजूदा बीमा स्कीमों में बाह्य रोगी देखभाल के लिए कवरेज की कमी की वजह से देखभाल का विखण्डन होता है जिससे देखभाल का स्तर द्वितीयक और तृतीयक स्तरों की दिशा में बढ़ जाता है।

1.7. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत राज्यों को निधियों का आबंटन, स्वास्थ्य परिणाम संकेतकों अथवा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़ेपन की बजाय राज्यों की जनसंख्या, क्षेत्र और विशेष श्रेणी के आधार पर किया जाता है।

1.8. कुछ राज्य केन्द्र-प्रायोजित स्कीमों जैसे की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए अपने निर्धारित हिस्से का अंशदान नहीं करते हैं।

2. सुझाव

2.1. सेवा प्रदायगी के लिए समस्तरीय एकीकरण और संसाधनों का एकल पूल सृजित करने की जरूरत है ताकि जिलों द्वारा, आवश्यकता के अनुसार, सम्मत ‘अनिवार्य स्वास्थ्य पैकेज’ की योजना बनाकर उसका प्रभावी कार्यान्वयन किया जा सके।

2.2. राज्यों के लिए अपने स्वास्थ्य बजटों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

2.3. बीमा स्कीमों में, पूर्व-निर्धारित पैकेज दरों का उपयोग करते हुए, प्रदाता भुगतानों के संबंध में निदान संबंधी समूह (डीआरजी) रीति की दिशा में आगे बढ़ने पर विचार किया जा सकता है क्योंकि यह प्रदाताओं को लागतों को कम करने और अधिक दायित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।

2.4. राज्यों को एनएचएम संसाधनों के आबंटन के सूत्र में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, रक्ताल्पता और कुपोषण जैसे परिणाम संबंधी मानदंडों को शामिल किया जा सकता है।

2.5. केन्द्रीय बजट 2015-16 के आबंटनों के परिणामस्वरूप राज्यों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी केन्द्र-प्रायोजित स्कीमों में अपना हिस्सा बढ़ाने की जरूरत है।

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rohit sharma 3 साल 9 महीने पहले

consolidated all separate programs in on one which cover 80 % of the issues. mobile van with GPS are best solution for reducing the cost for separate scheme. Mass based health insurance care & treat ments scheme like recently launched can be used by gov. Health services should be put in concurrent list as right of citizen & let each state bear half the burden & with this they also will need to increase their budget. income tax payer should be given benefited for increase insurance coverage. people below poverty line having ration cards should be given health cards for 50-50% insurance premium & their gov can take decision for increasing coverage for no. of common diseases. people should have option to increase Premium for the no. of diseases covered. money can be utilized for other bpl perons coverage. health insurance should be also automated to mobile & in this local post office can play big role. complaints & issues redress al system should be made available via app. in all national languages also in voice to text. private investigation agencies can be employed for checking the claims.

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Shyam sundar varadhan 3 साल 11 महीने पहले

New roads once laid are dug by electrical/ sewage/ phone agencies for their work. A road agency with all stakeholders to be constituted to ensure all under road works to be done before laying . once laid the contractors must guarantee for atleast 10 years and the concerned govt officers also to be made accountable.This will save huge huge money. Also new roads should not be laid for the next 10 years. Such should be the quality of them. Public who damage roads also have to pay. JaiHind

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DESH RATNA 3 साल 11 महीने पहले

Respected Prime Minister,
Heard today's MAN KI BAAT .
Sir , the roads are built when Great financial resource is incurred to get the same built and be operative.BUT the correct usage of the road after it is built is not being taken as we all in our mentality are biased towards DAY AND NIGHT timings.In nights roads are used by only those who find it unavoidable.If MyGOV just thinks how to use Roads in night ,25% more returns can be extracted from Available resources.

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pushpendra Lodha 3 साल 11 महीने पहले

Govt. has put approx 450 essancial drugs under price control and feel proud, the proud moment will come when these essential drugs will be provided free for all and it is possible, India market is approx 30000 cr for these drugs and actual manufacturing cost approx 6000 to 8000 cr which is significantly less amount what govt. pay for medicine of only govt. employee, our PM emphasise more on production/manufacturing and i beleive this message will reach to him and somthing better can be done.