अपने दादा-दादी, नाना-नानी का इंटरव्यू रिकॉर्ड कर उनके बचपन की यादें साझा करें

Last Date Jul 15,2020 23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)

अपने दादा-दादी, नाना-नानी पर आधारित एक फिल्म बनाएं और हमसे साझा करें ...

अपने दादा-दादी, नाना-नानी पर आधारित एक फिल्म बनाएं और हमसे साझा करें

मन की बात के ताजा एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के बच्चों से आग्रह किया है कि वे अपने दादा-दादी, नाना-नानी से बात करें और उनसे उनके बचपन के बारे में पूछें: वे कौन से खेल खेलते थे, वे कभी नाटक या सिनेमा देखने जाते थे या नहीं, वे छुट्टियों में किन-किन रिश्तेदारों से मिलने जाते थे और कैसे त्यौहार मनाते थे ।

इन कहानियों से बच्चों को न केवल पहले के भारत के बारे जानने को मिलेगा, बल्कि परिवार के लिए एक अमूल्य खजाना भी तैयार हो जाएगा, जो हमेशा के लिए एक यादगार बन जाएगा।

सभी बच्चों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है (और वयस्कों के लिए भी), ‘कब रिपोर्टर’ की तरह अपने दादा-दादी, नाना-नानी या परिवार में किसी बुजुर्ग का इंटव्यू लें और वीडियो रिकॉर्ड कर MyGov परिवार के साथ साझा करें!

बटन दबाओ, कहानी सुनो और सुनाओ!

फिल्म अपलोड करने के लिए दिशा-निर्देश:
1. कृपया अपनी फिल्म अपने यूट्यूब (youtube) चैनल पर अपलोड करें।
2. MyGov / my submission (सबमिशन) में लॉगिन करें।
3. कमेंट सेक्शन में अपनी फिल्म का यूट्यूब (youtube) लिंक यहां पेस्ट करें।

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Smriti Pandey 25 मिनट 40 सेकंड पहले

Sanskar Pandey (my brother) is a cub. Its really a great opportunity to join the innivative effort of recalling the memories of our grand parents.
We live at Nainital with our parents and our grand parents likes at Haldwani.
We frequency use to go there to meet them.
We like the conversation with our grand parents Narottam Pandey and Neema Pandey...
@ Reporter -
Cub- Sanskar Pandey, class 2nd,
Bulbul - Sanskriti Pandey, Class 6th,
Guide- Smriti Pandey, Class 10th
Nainital Uttarakhand

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Anuj Mishra 37 मिनट 4 सेकंड पहले

Mujhe hasana unko aata hai aur dur karke rulana bhi, Pyarr se jo dekhte mujhe Kardu khudko hawale unke..Mujhe ek batt bas pata hai Mujhe unko hasana aata hai mujhe unko khush karna aata hai aur unko mujhe Hasana aata hai unko mujhe khush rakhna aata hai.Jeevan ke iss dorr mae hame ek dusre kee dor pakadna aata hai.

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Anuj Mishra 40 मिनट 57 सेकंड पहले

Grandparents Ke bare mae kya kahu Izaat Ka agla namm hai Nana/Nani Aur Dada/Dadi,
pyarr karee too pyarr milee na kare to bohot pyarr milee.Bhagwan kee gift hote hai woo Aashirwad Hote hai woo.
Pyarr hamm kya de unhe dekh ke khud he aata hai..Yadd hamm kaise kare Dil mae basee hai.
Meri Yaddgar lamhe Hai jo Mae Bhula na sakuu Mae Mitt jauu parr woo yadd na mita sakuu.Kya kahu Mae kaise rota tha aur woo kaise mujhe chup karte,kya kahu woo kaise mujhe khilate the aur mae khata tha -words are less😊

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Manas Raj Singh 1 घंटा 7 मिनट पहले

Now, my grandparents are sharing heaven with almighty God and living happily. With their blessings, I'm joining stone to build the Nation strongest. We miss story telling, affection, love and lots more. They were the bullet proof between parents. They taught about society and livelihood. Each of their words, heard during childhood, gives strength, power to do better and correlate with the past and present functioning social relations. In small family, children are missing these things.

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Nilesh singh 1 घंटा 54 मिनट पहले

नमस्कार सर..
हमलोग अप्रैल से जून तक नानी के घर जाते थे गर्मी की छुट्टी व आमों का क्रेज़ क्या बताऊँ..मज़ा आ जाता
नानी के 36 पेड़ों का एक और 9 पेड़ों का दूसरा दो बगीचे थे..जिसे हमलोग क्रमशः बड़की बारी व छोटकी बारी कहते थे। आमों में हमारे यहां बड़का,बेलवा, सेनुरूहवा,कोइला, चोपिअहवा,पता नही कितनी प्रजातियों के आम थे।आंधी आने पर नानी के डाट को दरकिनार कर हम सभी भाई-बहन बाग में आम बीनने पहुच जाते..और ओसौनी ओढ़कर आम बीनकर फ्रॉक में इकट्ठा करते..बूढ़े भागवत मामा थे जो हर साल आम की रखवारी करते ..continue..

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Nilesh singh 1 घंटा 55 मिनट पहले

continue..रोज़ सुबह पेड़ का पका हुआ आम हमलोगों को खाने को लाते,और नानी हम लोगों को आम -रोटी के नास्ते में खिलातीं.ना तो अब गर्मी की छुट्टी होती,ना नानी रही,ना भागवत मामा रहे और ना ही बड़की व छोटकी बारी रही..सब आम-जामुन कट गए।नानी के स्वर्गवास के बाद नानी के यहां की सारी खेती,बाग बगीचे हमलोगों को मिले किन्तु "लग्गी लेकर आम व जामुन में पके फल तोड़कर पूरे मोहल्ले के बच्चों को घर से बगीचे व बगीचे से घर तक पीछे- पीछे घुमाने की जो रियासत थी वो कहीं यादों में गुम हो गयी"..समाप्त😊

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Gosika Sarayu 1 घंटा 58 मिनट पहले

The time we spend with our grandparents is just like a treasure......... Those memories can never be replaced. I enjoy the which I spend with them. From my birth to today they my Dada dadi are with us. Nobody actually knows how much I am attached to them and how much I love them. Nana Nani also live in the same town we visit them often. They live alone. I love spending time with them. PM modi has really given a very good challenge........... Thank you sir..........