संघ प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पर अपने विचार साझा करें

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Last Date Mar 31,2016 18:00 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चे के अस्थित्व और जीवन की ...

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चे के अस्थित्व और जीवन की गुणवता में सुधार करके के लिए एक पहल है|

स्वास्त जाँच में मुख्य रूप से ४-डी शामिल है| जन्म के समय दोष, कमिया, रोग, विकास में देरी और विकलांगता, RBSK के तीन घटक होते है|

1. जन्म के समय स्वास्त जाँच |
2. ६ सप्ताह से ६ साल आंगनवाडी के माध्यम से |
3. ६ साल से १८ साल स्कूल में |

प्रारंभिक चरण में बच्चो की सक्रीय एव समर्पित स्क्रीनिंग के माध्यम से निच्छित रिप से बच्चे के जीवन की गुणवक्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी और सामान्य जीवन चक्र से किसी भी विचलन के लिए सुधार संभव हो जायेगा|

गतिविधिया शामिल :-

1. पूर्ण स्वास्थ की जाँच
2. विभिन्न मुद्दो पर स्वास्थ शिक्षा
3. राष्ट्रीय कार्यक्रम पर शिक्षा प्रदान करना जैसे NLEP, NVBDCP,RNTCP

क्या आप मानते बच्चे की स्क्रीनिंग प्रारंभिक चरण में करने से लम्बे समय में जीवन में सुधार होगा?

कई माता पिता के पास समय नहीं होता और वह अपने बच्चो और उनके स्वास्थ की उपेक्षा करते है| उन्हें आभास ही नहीं होता की यह उनको एक विपदा की तरफ प्रसार कर सकता है जीवन के बाद के चरण में क्या आपने कभी सोचा है की उन्हें कितना दर्द महसूस होगा जब उनका खुद का बच्चा अलगाव के दौर, डिप्रेशन विकृति के कारण,

उदाहरण:- फांक होठ – जो बच्चे में सबसे आम जन्म दोष है| इस सुधार के लिए सबसे अच्छा तब है जब बछा १०-१२ हफ्ते का हो जाये|

क्या आपको लगता है की स्कूल एव आंगनवाडी में स्वास्थ शिक्षा देना एक जरिया है कई अच्छी प्रथायो प्रतन करने का?

हम सभी जानते है नारे के बारे में “अभ्यास एक आदमी को परिपूर्ण बनता है“ फिर भी हमें लगता है की हम किसी भी स्वास्थ शिक्षा कार्यक्रम में अभ्यास सुनने एव भाग लेने में अपना वक्त बर्बाद कर रहे है|

क्या आपने कभी सरल स्वास्थ शिक्षायो का विश्लेषण किया है| शिक्षा बहुत पैसे कमा सकती है| जो अन्यथा आपके दर्द के इलाज के लिए जायेगा|
उदाहरण :- उचित हाथ धोने की तकनीक का अभ्यास नहीं करना दस्त का कारण बनता है|

आप अपनी टिप्पणियां 31 मार्च 2016 को शाम 6:00 बजे तक भेज सकते हैं।

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AKASH BALI 3 साल 8 महीने पहले

Yes,I agree with both the points.
1.In early childhood the health check up is necessary to create awareness sarpanchs,gram pradhans should be involved and educated.
2.Angadwadis will lead the second phase,so we need have online attendance of all the angadwadis on regular basis.To check their presence and work.

300
m rathod 3 साल 9 महीने पहले

Namaste,as a pediatrician I hd done research on childrens physical,mental and intellectual well being and my first long term solution for malnutrition n poverty in vanvasi and rural area is kindly divide forest department into two section 1) forest 80% 2) timber trading industry20%

Forest area should be based on green sources65% and wildlife protected zone 35%
(Main part >> SUJAL-water ponds,small dams & SUFAL-need 75% different types fruit plants)

2.Timber trdng industry plants

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sunil vishwanath dharkar 3 साल 11 महीने पहले

namste, sir mai ek chhote goanka nagrik hu aur mujhe aapse ek jaruri baat kehna chahta hu jo ki yah hai aur aapse badlaw ki ummid karta hu maine dekha schoolome aur collegome ladkiya surkshit nahi hai aap kehte hai beti bachao beti padhao lekin ladkiyoka jada shoshan unhe padane wale jents teacher hi unka shoshan kar rahe hai ispe meri aapse yah winti hai ki aap ladkiyo ke liye ladies teacher hi padhai yah niyam sabhi school aur college me jald se jald lagu karaye yah namraa winti

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Pankaj Jaiprakash Khandelwal 3 साल 11 महीने पहले

मेरा एक बेटा और एक बेटी हैं. दोनों को ही मैंने २०००-२००१ के दौरान ६ माह तक बाल-पाल रस का शहद के साथ सेवन कराया था. परिणाम ये है की उन्हें अव्वल तो जल्दी से मौसमी बीमारियां नहीं लगतीं. और अगर लग भी जाएँ तो ज़्यादा दिन व्याप्त नहीं रहतीं. ये बाल-पाल रस नागपुर जिले में देवलापार स्थित गो-विज्ञानं संशोधन केंद्र में बनती हैं. यदि छोटे बच्चों को इनका सेवन मात्र ६ माह भी करवा दिया जाये तो उनका बालपन और किशोरावस्था प्रायः रोगमुक्त हो सकती है. इनकी कीमत भी कुछ ज़्यादा नहीं होती.

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Emipro Technologies Pvt Ltd 4 साल 1 महीना पहले

Starting from schools, there should be constant efforts from teachers that they keep inspire students on the way of cleanliness, of them selves, school, and the place where they live. This may play a good role to keep good health of students ! #UnionTerritory, #DadraandNagarHaveli, #UTofDadraandNagarHaveli, #RashtriyaBalSwasthyaKaryakram, #RBSK, #MyGov

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chandra shekhar joshi 4 साल 1 महीना पहले

modi sir namskar..i m dr.joshi from utarakhand.mahoday main apko batana chata huin k sadhe 5 saal ka course krane k baad bhi ayush doctor aur allopathic doctors ki salary m antar kyo h.ek allopathic dr jab nrhm k contract m naukri krta h to uski salary 48-5 thousand whi dusri aur ek ayush dr usi contract ki naukri m 15-25 thousand pa raha h.ayush vibhag ka gathan hone k baad bhi koi improvement nhi hua h.agar vetan visangti issi prakar rhti h to ayush doctors m heen bhwana din pratidin badhegi

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Ravi sikarwar 4 साल 2 महीने पहले

Sir mostly govt hospital give the treatment for patient but all state government hospital not provided medicine so that patient trouble and that hospital staff told take the medicine private medical store.
So I requested sir pls take the needful action so that for patient and family care not trouble.
And govt told they give free treatment in govt hospital bt hospital staff misguided the patient and family.

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dr gajdatta chavan 4 साल 2 महीने पहले

It's very usefull scheme, it's help to make healthy nation..children's are tomorrows future of India.if they are suffering from critical disease then our progress will damage,and in this program dr findout these students who have a critical disease and treat them and Cure their disease...but this program is temporary,Center government will do it permanently.and in this program dr are from Ayurved pathy,Ayurved is a our nations proud.